कार्तिकेय जी की आरती

जय देव श्री कार्तिकेय, शत्रु सुखों के संहारक।
जय देव श्री कार्तिकेय, संकट हरने वाले हनक॥

त्रिशूलधारी, वीर बलशाली, देवों के देव प्यारे।
जय देव श्री कार्तिकेय, शत्रु सुखों के संहारक॥

स्वामी कुम्भकर्णी, सेनानी देवताओं के।
जय देव श्री कार्तिकेय, संकट हरने वाले हनक॥

भक्तों के दुख हरने वाले, कल्याणकारी शरण।
जय देव श्री कार्तिकेय, शत्रु सुखों के संहारक॥

जय देव श्री कार्तिकेय, शत्रु सुखों के संहारक।
जय देव श्री कार्तिकेय, संकट हरने वाले हनक॥
🌸 आरती का महत्व
कार्तिकेय जी की आरती करने से संकट दूर होते हैं।

वीरता, शक्ति और साहस की प्राप्ति होती है।

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विशेष रूप से स्कंदपुराण और कथाओं के अनुसार जन्मदिन व श्रावण मास में यह आरती बहुत पूजनीय मानी जाती है।